#Hindi Quote
More Quotes
जब रास्तों पर चलते चलते मंजिल का ख्याल ना आये तो आप सही रास्ते पर है I
स्वाभिमान मान्यता की एक अवस्था है कि एक व्यक्ति उतना ही महत्वपूर्ण और योग्य है जितना कि कोई अन्य इंसान।
नैतिकता और ईमानदारी से हमें आत्म-सम्मान और गर्व की अनुभूति होती है, जो हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाती है।
सभी की खुशियों का ख्याल रखते-रखते हम बड़े हो जाते हैं फिर एक दिन अचानक ही अपनी खुशी गायब हम पाते हैं।
खुद का भला करना एक और तरह का सम्मान है।
स्वयं के प्रति ईमानदार होना आत्म-सम्मान का सर्वोच्च रूप है। यदि आप कुछ महसूस नहीं कर रहे हैं, तो इसे न करें।
सभी की खुशियों का ख्याल रखते-रखते हम बड़े हो जाते हैं, फिर एक दिन अचानक ही अपनी खुशी गायब हम पाते हैं।
जब रास्तों पर चलते चलते मंजिल का ख्याल ना आये तो आप सही रास्ते पर है।
प्रेम या सम्मान का भाव सिर्फ उन्हीं के प्रति रखिए, जो आपके मन की भावनाओ को समझते हो, कहते है कि जलो वहाँ जहाँ जरूरत हो उजालो में चिरागों के मायने नही होते।
जब आप खुद से प्यार करते हैं, तो आप अच्छा महसूस करते हैं, आप अपनी विशेषताओं, अपनी प्रतिभा, अपने कौशल और अपनी क्षमताओं को महत्व देते हैं।