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जब ज़िंदगी आपको पीछे धकेल दे, तो समझ जाना एक बड़ी छलांग लगाने का वक़्त आ गया है।
नही हो अब तुम हिस्सा मेरी किसी हसरत के,
सपने वो नहीं जो हम सोते वक्त देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।
मैं बिन फेरों के भी रिश्ता निभाऊंगा बश तुम मेरा हाथ थामें रखना
यहाँ तो लोग नफरत भी करते है प्यार की तरह।
समझ लेना तुम मुझे मेरे बिना कहे खामोशी समझना भी प्रेम ही है
अब वो नफरत में बदल गयी है।
तुम ना ही मिलते तो अच्छा था,
सपने वो नहीं होते जो हम सोते वक्त देखते हैं, सपने वो होते हैं जो हमें सोने नहीं देते।
मनुष्य कर्म से महान होता है, जन्म से नहीं। ~ आचार्य चाणक्य