#Hindi Quote

कभी भी शादियों के भोजन की बुराई मत करना, कोई पिता वर्षो कमाता है एक दिन की दावत के लिए।

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न जाने कितने ही रिश्ते खत्म कर दिये इस भ्रम ने कि मैं सही हूं, सिर्फ मैं ही सही हूं
जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका आपसे बात करने का तरीका भी बदल जाता है।
इंसान का ‘ज़मीर’ और शतरंज का ‘वज़ीर’ एक जैसा होता है क्योकी अगर दोनो मर गए, तो खेल खत्म
मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िंदगी में, बस हम गिनती उसी की करते है, जो हासिल न हो सका
ताश का जोकर और अपनों की ठोकर अक्सर बाजी घुमा देते हैं।
एक भाई पिता-माता का भी रोल अदा करता है।
आपके माता-पिता के सिवा ऐसा कोई नहीं है, जो आपको खुद से ज्यादा सफल देखना चाहता है!
बहुत दुर तक जाना पड़ता है सिर्फ यह जानने के लिए..कि नज़दीक कौन है
लोग आपको नहीं आपके अच्छे वक़्त को अहमियत देते हैं
बेटी की तरफ से अपने पिता के लिए