#Hindi Quote

तुझे कौन जानता था मिरी दोस्ती से पहले तिरा हुस्न कुछ नहीं था मिरी शाइरी से पहले

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अगर तुम्हारी अना ही का है सवाल तो फिर चलो मैं हाथ बढ़ाता हूँ दोस्ती के लिए
ऐ दोस्त तुझ को रहम न आए तो क्या करूँ दुश्मन भी मेरे हाल पे अब आब-दीदा है
दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से
भूल शायद बहुत बड़ी कर ली दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली
मुझे दोस्त कहने वाले ज़रा दोस्ती निभा दे ये मुतालबा है हक़ का कोई इल्तिजा नहीं है
पहले वह आप पर ध्यान नहीं देंगे फिर वह आप पर हसेंगे फिर वह आप से लड़ेंगे और तब आप दिख जाएंगे ।
मेरे हम-नफ़स मेरे हम-नवा मुझे दोस्त बन के दग़ा न दे मैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँ-ब-लब मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
वो दिन नहीं वो रात नहीं वो पहले जैसे जज़्बात नहीं, होने को तो हो जाती है बात अब भी मगर इन बातों में वो बात नहीं।
अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए
अगर कसमें सच होती तो, सबसे पहले भगवान मरता है I