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लम्हे तो है बीते सारे लेकिन लगते है आज भी जैसे हो वो कल
समझ नहीं आता किस पर भरोसा करू,
बेकार में मोहब्बत से नफरत हो गयी।
प्यार में अगर किसी के लिए रोना आए तो समझ लेना प्यार सच्चा है
जैसे प्यार को मानते ही नहीं थे।
परिस्थितियां चाहे कैसी भी हो, अगर मन में ठान लो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।
धोखा देकर ऐसे चले गए,
इससे ज्यादा इश्क का सबूत और क्या दूं साहब मैंने उसके जिस्म को नहीं उसकी रूह को चुना है
मैं बिन फेरों के भी रिश्ता निभाऊंगा बश तुम मेरा हाथ थामें रखना
नही हो अब तुम हिस्सा मेरी किसी हसरत के,